इस वीडियो में हम सीखते हैं कि बायस ट्रेडिंग में प्राइस चार तरीकों से मूव करता है: पीओआई से लिक्विडिटी, लिक्विडिटी से पीओआई, पीओआई से पीओआई और लिक्विडिटी से लिक्विडिटी। साथ ही, हम गोल्ड के पिछले सप्ताह का विश्लेषण और अगले सप्ताह के लिए ट्रेड प्लान समझेंगे।
प्राइस मूवमेंट के चार प्रकार ⏱ 1:37
•प्राइस हमेशा पीओआई से लिक्विडिटी और लिक्विडिटी से पीओआई की ओर मूव करता है।•पीओआई से लिक्विडिटी तक का मूवमेंट 'मेन बायस' होता है, यह ट्रेंड के साइड में होता है और इसमें विनिंग प्रोबेबिलिटी ज्यादा होती है।•लिक्विडिटी से पीओआई तक का मूवमेंट 'रिवर्सल बायस' होता है, यह काउंटर-ट्रेड होता है और बिगिनर्स को इसे अवॉइड करना चाहिए।•पीओआई से पीओआई मूवमेंट बड़ी रेंज के कंसोलिडेशन में होता है और लिक्विडिटी से लिक्विडिटी मूवमेंट छोटी रेंज के कंसोलिडेशन में। इन दोनों कंडीशन में ट्रेड लेने से बचना चाहिए।•शेर और गुफा के उदाहरण से समझाया कि प्राइस लिक्विडिटी हंट करने के बाद जरूरी नहीं कि आगे बढ़े, वह पीओआई की ओर लौटता है।बड़े टाइम फ्रेम क्यों जरूरी हैं ⏱ 9:50
•मंथली, वीकली, डेली चार्ट देखने से बायस खोजना आसान होता है।•जैसे पहेली में पीछे से देखने पर रास्ता साफ दिखता है, वैसे ही बड़े टाइम फ्रेम पर डायरेक्शन साफ दिखता है।•5 मिनट या 1 घंटे के चार्ट में बायस फाइंड करना बेवकूफी है क्योंकि वहां प्राइस डाउनट्रेंड और अपट्रेंड में बार-बार बदलता रहता है।•जब छोटे टाइम फ्रेम के पीओआई बड़े टाइम फ्रेम की लिक्विडिटी के सामने कमजोर होते हैं, तो समझ आती है कि बड़ा टाइम फ्रेम क्यों जरूरी है।मिरर कांसेप्ट से कॉन्फिडेंस कैसे मिलता है ⏱ 22:21
•जब ट्रेड लंबा चल रहा हो और डर लगे कि क्या प्राइस सही दिशा में जाएगा, तो मिरर कांसेप्ट से मदद मिलती है।•जैसे भौतिकी में लाइट एक सीधी दिशा में जाती है और मिरर से टकराकर उल्टी दिशा में रिफ्लेक्ट होती है, वैसे ही प्राइस पीओआई (मिरर) से टकराकर उल्टी दिशा में मूव करती है।•गोल्ड के उदाहरण में, जब प्राइस डेली ऑर्डर ब्लॉक से नीचे लौट रही थी, तो नीचे बने ऑर्डर ब्लॉक और एफपीजी मिरर का काम करते हैं जो प्राइस को वापस ऊपर धकेलते हैं।•ये मिरर (पीओआई) ट्रेड को आगे बढ़ाने में कॉन्फिडेंस देते हैं और प्राइस को आगे की लिक्विडिटी तक ले जाते हैं।गोल्ड का चार्ट विश्लेषण: मंथली से डेली तक ⏱ 9:50
•मंथली चार्ट: पिछले महीने की लिक्विडिटी हंट हुई है, नीचे कोई पीओआई नहीं है, इसलिए प्राइस लोअर टाइम फ्रेम के पीओआई की ओर जाएगी।•वीकली चार्ट: लिक्विडिटी हंट के बाद प्राइस ने नीचे क्लोज किया, लेकिन नीचे कोई पीओआई नहीं है, इसलिए प्राइस डेली के पीओआई की ओर जाएगी।•डेली चार्ट: एक ऑर्डर ब्लॉक बना है, जहाँ प्राइस ने टैप किया, डिस्प्लेसमेंट दिया और रिटेस्ट किया। इससे पता चलता है कि प्राइस ऊपर की ओर लिक्विडिटी हंट करेगी।लोअर टाइम फ्रेम में एंट्री और ट्रेड प्लान ⏱ 30:12
•पहले 4 घंटे के चार्ट में ऑर्डर ब्लॉक और एफपीजी दिखा।•फिर 1 घंटे के चार्ट में मिटिगेशन ब्लॉक और ऑर्डर ब्लॉक दिखा।•अभी मार्केट स्ट्रक्चर शिफ्ट (MSS) नहीं हुआ है, इसलिए सीधे एंट्री नहीं लेनी चाहिए।•पहले स्विंग बनने का इंतज़ार करें, प्राइस ऊपर क्लोज करने के बाद रिटेस्ट पर एंट्री लें।•ट्रेड का टारगेट निकटतम लिक्विडिटी होगा, जो लगभग 1000 पिप्स दूर है।•एक बार लिक्विडिटी हंट होने के बाद, डेली टाइम फ्रेम में बने पीओआई से ही अगली एंट्री लें।•हर स्विंग से ट्रेड लेकर पूरे ट्रेंड को कैप्चर करने की कोशिश करें।पिछले सप्ताह के ट्रेड का उदाहरण और अगले सप्ताह की योजना ⏱ 34:52
•पिछले हफ्ते जब डेली ऑर्डर ब्लॉक हिट हुआ था, तो 1 घंटे के चार्ट पर एशियन सेशन में लिक्विडिटी ली गई और प्राइस तेजी से नीचे आया, लेकिन उस समय मैं सो रहा था।•न्यूयॉर्क सेशन में OTE (Optimal Trade Entry) से एंट्री ले सकते थे, जहाँ रिजेक्शन के बाद ट्रेड लेकर लगभग 600 पिप्स कैप्चर किए जा सकते थे।•मंडे से योजना: पहले बाय साइड में मूवमेंट का इंतज़ार करें, फिर ऊपर की लिक्विडिटी हंट होने के बाद अगले ट्रेड की प्लानिंग करें।•पूरे हफ्ते में 1-2 से ज्यादा ट्रेड न लें, और पूरे ट्रेंड को कैप्चर करने की कोशिश करें।मुख्य बिंदु
•प्राइस चार तरह से मूव करता है: पीओआई से लिक्विडिटी (मेन बायस), लिक्विडिटी से पीओआई (रिवर्सल बायस), पीओआई से पीओआई तथा लिक्विडिटी से लिक्विडिटी (दोनों कंसोलिडेशन में होते हैं)।•ट्रेडिंग में पीओआई और लिक्विडिटी दोनों को बराबर महत्व दें, केवल पीओआई पर ध्यान देना गलत है।•बड़े टाइम फ्रेम (मंथली, वीकली, डेली) से शुरू करें क्योंकि वहाँ दिशा साफ दिखती है, छोटे टाइम फ्रेम में बायस खोजना कठिन है।•जब ट्रेड में डर लगे, तो 'मिरर कांसेप्ट' का उपयोग करें - पीओआई एक मिरर की तरह प्राइस को उल्टी दिशा में रिफ्लेक्ट करते हैं।•गोल्ड के चार्ट में मंथली और वीकली लिक्विडिटी हंट हो चुकी है, अब प्राइस डेली के ऑर्डर ब्लॉक से ऊपर की लिक्विडिटी तक जा सकती है।•ट्रेड लेने से पहले MSS का होना आवश्यक है, और पहले स्विंग का बनना; 1 घंटे से नीचे के टाइम फ्रेम में ट्रेड नहीं करना चाहिए।निष्कर्ष
यह वीडियो बायस ट्रेडिंग में चार प्राइस मूवमेंट्स, मिरर कांसेप्ट और बड़े टाइम फ्रेम के महत्व को समझाने के साथ-साथ गोल्ड के अगले सप्ताह के ट्रेड प्लान को विस्तार से बताता है। अगली वीडियो में SMC और ICT को बेसिक से एडवांस तक समझाया जाएगा।